
बिहार में ‘बदलाव’ का संकेत अस्पष्ट है।लेकिन चुनाव के प्रति पहले चरण में बहुत गजब का उत्साह देखने को मिला पूर्व के सारे रिकॉर्ड टूट गए
क्या यह उत्साह एंटी-इनकम्बेंसी (बदलाव की चाहत) की वजह से है, या एसआईआर प्रेरित भय (योजनाएं न कट जाएं) की वजह से? परिणाम जो भी हो, यह रिकॉर्ड मतदान बिहार की राजनीति में जाति, कल्याणकारी लाभ और आधिकारिक डर के जटिल मिश्रण को उजागर करता है।
बिहार में रेकॉर्ड तोड़ मतदान बदलाव का संकेत ना होकर स्थाई और स्थिर सरकार का संकेत देती है रेकॉर्ड तोड़ मतदान का कारण यही है कि लोगो का नाम सूची में जोड़ा और काटा जा रहा था ऐसी स्थिति में लोगो को मतदान जरूरी समझ में आया यह एक तरह से बैंक के kyc करवाने जैसा था जब लोगो का बैंक का खाता बंद हो जाती है तो बैंक ट्रांजक्शन जरूरी समझ मे आता है तो उसी तरह लोगो को वोट देना भी इस बार जरूरी समझ मे आया
लेकिन इतना अधिक मात्रा में महिलाओं की मतदान में भागीदारी नीतीश सरकार बनाने की संकेत देती है हालांकि आप इस बात से इनकार नही कर सकते कि महिलाओं ने यह मतदान माई बहन योजना के लोभ में फंस कर राजद के लिए किया हो लेकिन यह तभी संभव है जब बिहार की महिलाएं अभी भी अदूरदर्शी नासमझ और और बेबकुफ़ होंगी